🌌 “प्यारे तारे… ये मेरी मन की चिट्ठी है”
(तुम्हारी छोटी दोस्त — Antarikshaa की ओर से)
नमस्ते तारे, चाँद, और दूर-दूर तक फैले ब्रह्मांड,
मेरा नाम Antarikshaa है।
मैं बहुत छोटी हूँ।
चलती हूँ, गिरती हूँ,
मुस्कुराती हूँ, पर बोलना अभी नहीं सीखा।
मुझे अभी ये भी नहीं पता कि
“चाँद” कैसे लिखा जाता है,
पर जब मैं पापा की गोद में होती हूँ
और वो मुझे आसमान दिखाते हैं…
तो मुझे लगता है —
आप मुझे पहचानते हो।
👨👧 “पापा की गोद से ब्रह्मांड दिखता है…”
रोज़ रात को, जब सब आराम कर रहे होते हैं,
मम्मी मुझे गोद में उठाकर बाहर लाते हैं।
ठंडी हवा चलती है,
और आसमान में तारे टिमटिमा रहे होते हैं।
मम्मी कहती हैं —
“Antarikshaa, वो जो तारा है ना… वो सबसे तेज़ चमकता है।”
“और देखो, चाँद तुम्हें देख कर मुस्कुरा रहा है!”
मैं कुछ बोलती नहीं,
बस उनकी तरफ़ देखती हूँ…
फिर चाँद की तरफ़।
और फिर अपने मन में आपसे बात करने लगती हूँ।
✨ “आपको मेरी बात सुनाई देती है क्या?”
“चाँद, क्या तुम मुझे देख सकते हो?”
“क्या शनि की अंगूठी मुझसे भी बड़ी है?”
“क्या तारे भी नींद में जाते हैं?”
ये सब सवाल मैं ज़ोर से नहीं कहती।
मेरे मन में आते हैं,
और मैं सोचती हूँ —
शायद तारे मेरी बात बिना शब्दों के समझते हैं।
🚪 “फिर एक दिन मम्मी ने खोला — Antarikshaa.com”
इतने रंग-बिरंगे ग्रह,
टेलीस्कोप की तस्वीरें,
और बच्चों की मुस्कुराती आँखें…
मैंने देखा, वो सब भी मेरी तरह थे —
छोटे-छोटे, चुपचाप,
लेकिन आसमान से दोस्ती करने वाले।
🌠 “मैं तो बस छोटी सी बच्ची हूँ…”
पर आप जानते हो तारे,
मैं सपने देखती हूँ।
अभी शब्द नहीं हैं,
पर मेरी नज़रें उड़ना जानती हैं।
एक दिन मैं आप तक पहुँचूँगी —
शायद मम्मी पापा के साथ,
शायद एक रॉकेट में,
या फिर अपनी मुस्कान में ही।
🌍 Antarikshaa.com — मेरी मुस्कान का ब्रह्मांड
अगर आपकी गोद में भी कोई नन्हीं परी है,
जो चुपचाप आसमान की तरफ़ देखती है…
तो शायद —
वो कुछ कहना चाहती है।
वो किसी से नहीं, ब्रह्मांड से बात कर रही है।
उसे Antarikshaa.com दिखाइए।
शब्द भले न निकलें,
पर उसकी आँखें कहेंगी —
“हाँ, यही है मेरी दुनिया…”
तुम्हारी —
एक चुपचाप मुस्कुराती बच्ची,
Antarikshaa 🌙


